स्टीफन हॉकिंग ऐसे वैज्ञानिक जिन्होंने आधुनिक दुनिया में ईश्वर की सत्ता को नकार दिया था। अल्बर्ट आइंस्टीन के बाद स्टीफन हॉकिंग्स ही एक वैज्ञानिक के तौर पर दुनियाभर में लोगों के दिलों में अपनी जगह बना पाए। 21 वर्ष की अवस्था में उ्न्हें मोटर न्यूरॉन नाम की बीमारी हुई। ऐसा लग रहा था कि वे अपनी पीएचडी नहीं पूरी कर पाएंगे, लेकिन सभी कयासों को गलत साबित कर वे 55 साल तक जिए। वे यूके, ऑक्सफोर्ड में 8 जनवरी, 1942 को जन्मे थे। उनके पिता  चिकित्सा विज्ञानी थे मां दर्शनशास्त्र की स्नातक।

स्टीफन हॉकिंग ने लंदन के पास स्थित संत अलबांस स्कूल में शुरुआती पढ़ाई की। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से भौतिकी में प्रथम श्रेणी की डिग्री हासिल की। उनके शोध की शुरुआत 1962 से हुई। कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में एक स्नातक के तौर पर उनका नामांकन हुआ। वहां आधुनिक ब्रह्मांडशास्त्र  के जनक डेE##निस स्किआमा उनके गुरु बने।

सामान्य सापेक्षता सिद्धांत पुनर्जागरण काल के दौरान प्रक्रिया में था। उसी वक्त लंदन के ब्रिकबेक कॉलेज में वैज्ञानिक रोजर पेनरोज ने नई गणितीय तकनीकी से लोगों को रुबरू कराया। जिसमें बताया गया कि गुरुत्वाकर्षण शक्ति की समाप्ति अनन्त की ओर इशारा करती है। उन्होंने एक नई भौतिकी की ओर इशारा किया।

फिर अंतरिक्ष में ब्लैक होल्स की परिकल्पना हुई। 1973 में द लार्ज स्केल स्ट्रक्चर ऑफ स्पेस-टाइम (कैंब्रिज यूनिवर्सिटी प्रेस) से शोध पत्रों की सीरीज बाहर आई। इसमें जॉर्ज इलिस भी हॉकिंग के साथ थे। ब्लैक होल्स के हॉरिजोन की भी बात हुई। अंत समय स्टीफन हॉकिंग्स ने अपनी पुस्तक ब्रीफ आंसर टू द बिग क्विश्चन यानी बड़े सवालों के सारगर्भित जवाब दिए। उन्होंने कहा कि यह ब्रह्मांड स्वत: स्फूर्त है और इसका कोई निर्माणकर्ता यानी ईश्वर नहीं है। उन्होंने एक ब्लैक होल्स की बात जरूर की जो किसी नए ब्रह्मांड का रास्ता हो सकता है।14 मार्च, 2018 को स्टीफन हॉकिंग का निधन हो गया। By Vivek Mishra

 

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