मुबारक साल गिरह :  पेन्‍ट‍िंग है पहला प्‍यार

एजेंसी:संजोग वॉलटर: बॉलिवुड के मशहूर अभिनेता और निर्देशक अमोल पालेकर आज 80 साल के हो गएहैं । उनका जन्म 24 नवंबर 1944 को बम्बई (अब मुंबई) में हुआ था। उन्‍होंने जेजे स्‍कूल ऑफ फाइन आर्ट्स से पोस्‍ट ग्रैजुएशन करने के बाद करियर की शुरुआत बतौर पेंटर ही की थी। वह अक्‍सर कहते रहे हैं, ”मैं प्रशिक्षण पाकर पेंटर बना, दुर्घटनावश एक्‍टर बन गया, मजबूरी में प्रोड्यूसर बना और अपनी पसंद से डायरेक्‍टर बना।1971 में मराठी फिल्म से सिल्वर स्क्रीन पर आने वाले अमोल पालेकर करीब डेढ़ दशक तक छाए रहे। निर्देशक बासु चटर्जी और ऋषिकेश मुखर्जी के साथ उन्होंने कई बेहतरीन फिल्में की। गोलमाल के लिए तो उन्हें बेस्ट एक्टर का फिल्म फेयर अवॉर्ड भी मिला था। पेंटर से एक्टर बने अमोल पालेकर ने 1986 तक फिल्मों में काम किया और फिर निर्देशन में हाथ आजमाने के लिए अभिनय छोड़ दिया था। लेकिन वे 1994 में तीसरा कौन और 2001 में अभिनय कर चुके हैं ।

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अमोल पालेकर भारत के पहले ऐसे अभिनेता हैं जिनकी डेब्यू फ़िल्म ने सिल्वर जुबली तो मनायी ही, उसके बाद उनकी प्रदर्शित दोनों फ़िल्मों ने भी जुबलियां मनायीं। अमोल पालेकर ने 1974 में ‘रजनीगंधा’ से डेब्यू किया था। इसके बाद उनकी दो फ़िल्में 1975 में ‘छोटी सी बात’ और 1976 में ‘चितचोर’ प्रदर्शित हुई थीं। इन तीनों फ़िल्मों ने सिल्वर जुबली मनायी।
साधारण परिवार में जन्‍मे अमोल पालेकर ने बैंक में क्‍लर्क की नौकरी भी की थी। उनकी दो बड़ी और एक छोटी बहन थी। परिवार का फिल्‍म से दूर-दूर तक कोई नाता नहीं था। स्‍कूल-कॉलेज के दिनों तक अमोल ने कभी नाटक तक नहीं किया था। उनके पिता पोस्‍ट ऑफिस में काम करते थे। मां प्राइवेट कंपनी में नौकरी करती थीं। ग्रैजुएशन के बाद अमोल पालेकर ने बैंक ऑफ इंडिया में आठ साल तक नौकरी की। उन्‍होंने एक इंटरव्‍यू में कहा था, ‘जब मेरी शुरुआती तीन फिल्‍में सिल्‍वर जुबली हिट हो गई थीं, तब मेरे लिए नौकरी छोड़ना एकदम आसान हो गया था।

ऐक्टर बनने से पहले अमोल पालेकर थिएटर जगत में निर्देशक के रूप में स्थाई पहचान बना चुके थे। नामचीन निर्देशक सत्यदेव दुबे के साथ उन्होंने मराठी थिएटर में कई नए प्रयोग किए। 1972 में उन्होंने अपना थिएटर ग्रुप अनिकेत शुरू किया। वे ऐक्टिंग में आने से पहले थिएटर में निर्देशक के रूप में अपनी पहचान बना चुके थे। बासु चटर्जी, ऋषिकेश मुखर्जी और बासु भट्टाचार्य उनके नाटक देखने आया करते थे। 1971 में सत्यदेव दुबे की मराठी फिल्म शांतता कोर्ट चालू आहे से अमोल ऐक्टिंग में आए। यह मराठी सिनेमा की उल्लेखनीय फिल्म कही जाती है। हिंदी फिल्मों में उन्होंने 1974 में बासु चटर्जी की फिल्म रजनीगंधा से कदम रखा। फिल्म सफल हुई और फिर उनके अनवरत सफर का आगाज हो गया। उन्होंने ऐक्टर के रूप में चितचोर, घरौंदा, मेरी बीवी की शादी, बातों-बातों में, गोलमाल, नरम-गरम, श्रीमान-श्रीमती जैसी कई यादगार फिल्में दीं। वे ज्यादातर फिल्मों में मध्यवर्गीय समाज के नायक का प्रतिनिधित्व करते दिखे। उनकी हास्य फिल्मों को दर्शक आज भी याद करते हैं। उन्हें खुशी है कि वे अपने करियर में फिल्म इंडस्ट्री के श्रेष्ठ निर्देशक और श्रेष्ठ तकनीशियनों के साथ काम कर सके। 1981 में मराठी फिल्म आक्रित से अमोल ने फिल्म निर्देशन में कदम रखा। अब तक वे कुल दस हिंदी-मराठी फिल्मों का निर्देशन कर चुके हैं। 2005 में उनकी फिल्म पहेली को ऑस्कर पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया था।
अमोल पालेकर ने दो शादियां कीं। पहली पत्‍नी चित्रा पालेकर से बेटी शलमाली हुईं। वह आजकल ऑस्‍ट्रेलिया की एक यूनिवर्सिटी में पढ़ाती हैं। संध्‍या गोखले से हुई बेटी का नाम उन्‍होंने समीहा रखा। उन्‍होंने कानून की पढ़ाई की है और दस साल न्‍यूयॉर्क में प्रैक्टिस करने के बाद आजकल समाजसेवा करती हैं।एजेन्सी। 

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