मुबारक साल गिरह।  कपिल देव रामलाल निखंज  पूर्व क्रिकेट खिलाड़ी हैं। भारत के सर्वश्रेष्ठ क्रिकेट खिलाड़ियों में उनकी गणना होती है। वे भारतीय क्रिकेट के कप्तान के रह चुके हैं। 1983 के क्रिकेट विश्वकप में वे भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान थे। और उनके नेतृत्व में टीम ने विश्वकप जीतने का गौरव प्राप्त किया। वे विस्डेन द्वारा 2002 में “सदी के भारतीय क्रिकेटर” चुने गये। वे 10 माह के लिये भारतीय क्रिकेट टीम के प्रशिक्षक भी रहे थे।

कपिल देव का जन्म (6 जनवरी 1980) चंडीगढ़ में हुआ था । उनका विवाह रोमी भाटिया से 1980 में हुआ था । उनकी बेटी अमिया देव का जन्म 16 जनवरी 1996 को हुआ था ।

उन्होंने अपने क्रिकेट जीवन की आरंभ 1975 में हरियाणा की ओर से  करी। वह  आल-राॅउन्डर थे। जोकि दायें हाथ से बल्लेबाजी एवं तेज गेंदबाजी भी करते थे। उनका अन्तर्राष्ट्रीय पदार्पण पाकिस्तान के विरुद्ध फैसलाबाद में 16 अक्टूबर 1978 को हुआ। यह श्रृंखला उनके लिए कुछ अच्छी नहीं रही। परन्तु आने वाले समय में उन्होंने अपने प्रदर्शन से भारतीय क्रिकेट टीम में अपना स्थान सुनिश्चित कर लिया। श्रीलंका के विरुद्ध 1982-83 में उन्होंने अपनी कप्तानी में प्रवेश किया। जब उन्हें विश्वकप की कप्तानी का अवसर मिला। तो वह एक औसत खिलाडी ही थे। परन्तु अपने आश्चर्यजनक प्रदर्शन, नेतृव क्षमता तथा अपनी टीम के सहयोग से भारत को प्रथम विश्वकप जिताया। और रातों-रात ही भारतीय इतिहास का चमकता सितारा बन गये। मोहम्मद अजहरुद्दीन की कप्तानी में उन्होंने 1992 के विश्वकप में अपना अंतिम अन्तर्राष्ट्रीय मैच खेला। उन्होंने अपने क्रिकेट जीवन में एक दिवसीय क्रिकेट में 225 और टेस्ट क्रिकेट में १३१ मैच खेले। उन्होंने एक दिवसीय क्रिकेट में 23-79 की औसत से 3783 रन तथा टेस्ट क्रिकेट में 31-05 की औसत से 5248 रन बनाये। उन्होंने गेंदबाजी करते हुए एक दिवसीय तथा टेस्ट क्रिकेट में क्रमशः 253 तथा 434 विकेट लिये।

1983 के विश्वकप में जिमबाब्वे के विरुद्ध उनकी 175 रन की अविस्मरणीय पारी खेली। जिसके कारण भारत वह मैच जीता। उन्होंने एक दिवसीय क्रिकेट में 1 और टेस्ट क्रिकेट में 8 शतक लगाए हैं। कपिल देव ने 1994 में अन्तर्राष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया। 1999 में उन्हें भारतीय क्रिकेट टीम का प्रशिक्षक चुना गया। इस अवधि में भारत का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा। जिसमें वे मात्र एक टेस्ट मैच जीते और आस्ट्रेलिया और साउथ अफ्रीका के विरुद्ध दो बड़ी श्रृंखला हारे। मनोज प्रभाकर द्वारा सट्टेबाजी में फंस जाने के बाद उन्होंने अपने प्रशिक्षक के पद को त्याग दिया। 2005५ में उन्होंने खुशी  राष्ट्रीय सरकारी संगठन की स्थापना करी। अभी वे उसके अध्यक्ष हैं। खुशी दिल्ली में कम विशेषाधिकृत बच्चों के लिये तीन विद्यालय चलाती है। 24  सितम्बर 2008 को उन्होंने भारतीय प्रादेशिक सेना में भाग लिया। और उन्हें लेफ्टिनेंट कर्नल के रूप में चुना गया। 197-80 अर्जुन पुरस्कार-1982 पद्मश्री-1983 – विस्डेन क्रिकेटर आफ द ईयर-1991 – पद्मभूषण-2002 – विस्डेन इन्डियन क्रिकेटर आफ द सेन्चुरी। चंडीगढ़ के कपिल्स इलेवेन रेस्टोरेंट के वे मालिक हैं। उन्होंने इकबाल, चैन कुली की मैन कुली तथा मुझसे शादी करोगी  फिल्मों में छोटे पात्र भी निभाए हैं। एजेन्सी

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