25 जुलाई  1978 का दिन इतिहास के पन्नो, तकनीक और मेडिकल साइंस के लिए बेहद खास है।  और भले रखे भी न क्यों| इस दिन मैनचेस्टर के ओल्डहैम जनरल हॉस्पिटल में जन्मीं लुइस जॉय ब्राउन 41  साल की हो चुकी है।  प्रोफेसर एडवर्ड्स के ही प्रयासों से 1978 में ओल्डहैम जनरल हॉस्पिटल में 1978 में लुईस ब्राउन का जन्म हुआ था। 

 दुनिया की पहली टेस्ट ट्यूब बेबी लुइस जॉय ब्राउन के जन्म होने के बाद ही उसकी 60 से ज्यादा जांचें की गई थीं, ताकि यह पता चल सके कि वह सामान्य बच्चों जैसी ही है।  लुइस आज पूरी तरह से सामान्य लाइफ जी रही है।  बता दें कि उनके दो बेटे हैं और वे दोनों भी सामान्य हैं।    लुइस ने 2004 में नाइट क्लब के बाउंसर वेस्ले मुलिंडर से मैरिज की थी। 

क्या  है आईवीएफ तकनीक?

आईवीएफ, वो करिश्माई तकनीक जिसने दुनिया की लाखों महिलाओं को खुशियों की किलकारियों का तोहफा दिया।  और आगे दे भी रही है।  आपको बता दे कि इस प्रकिया को इन विट्रो फर्टिलाइजेशन कहा जाता है।  असल में कोई टेस्‍ट ट्यूब नहीं होती, अंडाणु को पेटरी डिश में फर्टिलाइज कर कोख में ट्रांसप्‍लांट किया जाता है| लातिन शब्‍द इन विट्रो का मतलब ग्‍लास में हैं। 

 लुईस ने जिंदगी के ऐसे ही और अनुभवों पर किताब भी लिखी है।  इसका नाम है ‘माय लाइफ एज द वर्ल्ड्स फर्स्ट टेस्ट ट्यूब बेबी।  इस किताब में लुईस ने अपने कड़े अनुभवों कोई साझा करने का प्रयास करती है।  लुईस ने अपना अनुभव बाटते हुए लिखा कि लुईस “सुनने में कितना अच्छा लगता है न कि मैं दुनिया की पहली टेस्ट ट्यूब बेबी हूं। 

आखिर क्यों टेस्ट ट्यूब बेबी को शैतान की औलाद कहा करते थे?

इसके पीछे बहुत कड़वे लम्हे भी हैं।  कट्‌टरपंथी और रूढ़िवादी लोगों के लिए तो ‘शैतान की औलाद’ थी।  कंबल में लिपटी, टुकुर-टुकुर ताकती  परिवार की बेटी थी, पर कई लोग मुझे लैब में पैदा हुए चूहे जैसा मानते थे।  मेडिकल साइंस और मीडिया के लिए मैं एक करिश्मा और सेलिब्रिटी थी।  लोग मुझे अजीब सी नजरों से देखते थे। 

जानकारी के मुताबिक जब उन पर बायोग्राफी लिखी गई तो लुइस ने बताया कि उस समय लोग उनके माता-पिता को हजारों खत भेजते थे, जिसमें अधिकांश नफरत भरे होते थे।  लुइस ने बताया कि एक बार उन्हें एक ऐसा पत्र मिला जो खून में सना था।  उस समय के धार्मिक नेता और अधिकांश लोग इसे अवैध और अप्राकृतिक मानते थे।  वे बताती हैं कि एक बार उन्हें किसी ने टूटी हुई टेस्ट ट्यूब भेजी थी।  उन्हें कई धमकी भरे पत्र भी भेजे गए।  लोगों ने प्लास्टिक के भ्रूण तक भेजे।  टेस्ट ट्यूब बेबी को टॉयलेट बाउल या फिश टैंक में रखने का सुझाव देते थे । 

फर्स्ट टेस्ट ट्यूब बेबी के जन्म के बाद से आज तक दुनिया में तक़रीबन 85 लाख टेस्ट ट्यूब बेबी जन्म ले चुके हैं। आकड़ों पर गौर करे तो वर्तमान में करीब 5 लाख बच्चे हर साल दुनिया में इस तकनीक से जन्म लेते हैं।  भारत में 6 अगस्त 1986 को पहली टेस्ट ट्यूब बेबी हर्षा चावड़ा का जन्म हुआ था। उन्होंने एक बेटे को जन्म दिया है। भारत में IVF इलाज का खर्च करीब एक लाख रुपये आता है।

प्रोफेसर सर रॉबर्ट एडवर्ड्स का देहांत हो चुका है।

आज़ जिस आईवीएफ टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल होता है उसके जनक प्रोफेसर सर रॉबर्ट एडवर्ड्स थे| प्रोफेसर एडवर्ड्स को 2010 में नोबेल और 2011 में नाइटहुड से सम्मानित किया गया था। आज इस आईवीएफ टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल दुनियाभर में हो रहा है। दुनिया की पहली टेस्ट ट्यूब बेबी लुईस ब्राउन ने एडवर्ड्स को श्रदांजलि देते हुए कहा कि मैंने हमेशा रॉबर्ट एडवर्ड्स को अपने दादा की तरह माना। उन्होंने जो काम किया उससे दुनियाभर में लाखों लोगों की जिंदगी में खुशियां आईं। पहली टेस्ट ट्यूब बेबी लुईस ब्राउन ने कहा कि मुझे इस बात की खुशी है कि वो इतने लंबे समय तक हमारे बीच रहे कि अपने काम को नोबेल की मान्यता मिलते देख सके। दुनियाभर में आईवीएफ पर हो रहे काम के साथ उनकी विरासत आगे बढ़ती रहेगी।एजेन्सी। 

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