19 जून 1947 को जन्‍में क‍िसी पर‍िचय के मोहताज नही ब्रिटिश भारतीय उपन्यासकार और निबंधकार सलमान रुश्‍दी कई बड़े पुरस्‍कारों से नवाजे गए हैं।ऐसे में उनके ल‍िए यह लाइनें ब‍िल्‍कुल फ‍िट बैठती हैं क‍ि कलम से उठते हैं विवाद और किताबों पर मिलते हैं पुरस्‍कार। रुश्‍दी ने कई काम किए हैं। कॉपी राइटर से लेकर लेखक तक का उनका सफर अधिकांश विवादों में घिरा रहा है। अब तक इनकी सबसे ज़्यादा चर्चा इनकी किताब ‘सेटेनिक वर्सेस’ के विवादों में आने के चलते हुई। इस किताब और इनके जन्म की तारीख में एक खास बात ये कि इस नॉवेल में मुख्य किरदार का नाम सलीम है। जो ठीक उसी रात पैदा हुआ जिस रात भारत को अंग्रज़ों से आज़ादी मिली थी। यानि 15 अगस्त, 1947 को। कहा जाता है कि नॉवेल का सब्जेक्ट मुस्लिम कम्युनिटी के लोगों को ऑफेंसिफ लगा जिसके चलते उनका भारत आना मुश्किल हो गया। जान से मारने की धमकियां मिली और फतवे जारी हुए। इसी के चलते आज भी इनका ये नॉवेल भारत में बैन है।

सलमान रुश्‍दी के पिता अनीस अहमद रुश्‍दी और मां नेगीन भट्ट हैं। सलमान रुश्दी जन्म के कुछ समय बाद ही ब्रिटेन चले गए थे, जहां इंग्लैंड के रगबी स्कूल में उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा ली। इसके बाद उन्होंने कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में इतिहास का अध्ययन किया। साहित्यकार बनने से पहले सलमान दो ऐड एजेंसियों में कॉपी राइटर का काम कर चुके थे। सलमान रुश्‍दी ने पहली शादी 1976 में क्‍लेरिसा लुआर्ड से की थी। ये शादी करीब 11 साल (1987) तक चली. सलमान और क्लेरिसा का एक बेटा जफर है, जिसका जन्म 1979 में हुआ था। 4 नवंबर, 1999 में क्लेरिसा की मौत हो गई थी। इसके बाद सलामन रुश्‍दी ने 1988 में अमेरिकी उपन्यासकार मारिऑन विगिंस से की, लेकिन 1993 में दोनों का तलाक हो गया था.इसके बाद रुश्‍दी ने 1997 में उम्र में 14 साल छोटी एलिजाबेथ वेस्ट की, लेकिन ये शादी भी ज्‍यादा दिन नहीं चली और 2004 में दोनों का तलाक हो गया। दोनों का एक बेटा मिलान है, जिसका जन्म 1999 में हुआ था। 2004 में एलिजाबेथ से तलाक के बाद सलमान रुश्‍दी ने उसी साल एक्ट्रेस पद्मा लक्ष्मी से शादी की, 2 जुलाई, 2007 को ये शादी भी टूट गई।

सलमान ने अपना पहला उपन्यास ‘ग्राइमल’ 1975 में लिखा था, जिसे ज्यादा लोकप्रियता नहीं मिली. लेकिन उनके अगले उपन्यास ‘मिडनाइट्स चिल्ड्रन’ (1981) ने उन्हें रातों-रात प्रसिद्धि दिला दी। रुश्दी की इस किताब को पिछले 100 सालों में लिखी गई सर्वश्रेष्ठ किताबों में से एक माना गया था. इसके लिए उन्हें 1981 में ही बुकर सम्मान प्राप्त हुआ। इसी उपन्यास के लिए उन्हें 1993 और 2008 में भी पुरस्कार मिले। इसके बाद उन्होंने ‘शेम’ (1983), ‘द जगुआर स्माइल’ (1987), ‘द सैटेनिक वर्सेज’ (1988), ‘ईस्ट-वेस्ट’ (1994), ‘द मूर्स लास्ट साई’ (1995), ‘द ग्राउंड बिनीथ हर फीट’ (1999), ‘शालीमार द क्राउन’ (2005) जैसी प्रमुख और बेहतरीन रचनाएं लिखीं, जिनके लिए उन्हें कई पुरस्कार भी मिले।मिडनाइट चिल्ड्रेन पर 2012 में दीपा मेहता के डायरेक्‍शन में फ‍िल्‍म बनी थी। इसके पहले 1990 में उनको विलेन की भूमिका में रखकर पाक‍िस्‍तान में फ‍िल्‍म इंटरनेशनल गोरिल्ला बनी थी। सलमान को उपन्‍यासों और क‍िताबों को लेकर कई पुरस्‍कार म‍िले। साहित्य की सेवाओं के लिए रुश्दी को 2007 में नाइटहुड से सम्मानित किया गया। उनकी नोबेल पुरस्‍कार पाने की इच्‍छा फ‍िलहाल पूरी नहीं हुई है। सलमान रुश्‍दी का न‍िजी जीवन भी व‍िवादों में रहा। उनकी चौथी पत्नी रहीं पद्मलक्ष्मी ने उनपर असंवेदनशील इंसान होने के साथ ही गैरजिम्मेदार पति होने के इल्जाम लगाए थे। रुश्दी की नई नॉवेल ‘द गोल्डन हाउस’ 26/11 अटैक पर बेस्ड है। ये कहानी एक रईस परिवार की है जो मुंबई से न्यूयॉर्क आ जाते हैं। वो सारे मुंबई में बीती एक घटना को भुलाने की कोशिश कर रहे हैं।ये नॉवेल इस अातंकी हमले से जुड़े कई सवाल खड़े करती है। साथ ही इस घटना के बाद से क्या चेंजेज आए हैं उनका भी आकलन करती है। सलमान रुश्दी का होना यह बताता है कि हम एक में ही कई होते हैं।हममें ही अच्छाइयों की पराकाष्ठा होती हैं और बुराइयों की खाइयां भीं। रुश्दी के चरित्र के ये आयाम कई प्रसिद्ध लेखकों और व्यक्तित्वों की याद भी दिलाते हैं। फोटो सोशल मीडिया से ।एजेंसी।

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